Monday, December 1, 2025

Roopa Ganguly: महाभारत की द्रौपदी रूपा गांगुली का संघर्ष और सफलता का सफर

दूरदर्शन के लोकप्रिय शो ‘महाभारत’ में द्रौपदी का किरदार निभाकर रूपा गांगुली (Roopa Ganguly) भारतीय टीवी इतिहास की सबसे यादगार कलाकारों में शामिल हो गईं। बीआर चोपड़ा के इस ऐतिहासिक शो में उनकी अभिनय क्षमता, सहजता और भावनात्मक गहराई ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। विशेष रूप से ‘चीरहरण’ का सीन, जिसे उन्होंने एक ही टेक में शूट किया था, उनके करियर का सबसे मजबूत और भावनात्मक पल माना जाता है। शूट खत्म होते ही वह किरदार की वेदना में इतनी डूब गईं कि फूट-फूटकर रो पड़ीं। यही वजह है कि दर्शक आज भी उन्हें असली द्रौपदी के रूप में याद करते हैं।

रूपा गांगुली (Roopa Ganguly) का जन्म 25 नवंबर 1966 को कोलकाता के कल्याणी में हुआ था। बचपन से ही उनकी रुचि कला और संस्कृति में थी, हालांकि अभिनय में आने का कोई इरादा नहीं था। लेकिन एक शादी समारोह में फिल्म निर्माता बिजॉय चटर्जी से मुलाकात ने उनकी जिंदगी बदल दी। उन्होंने रूपा को अपनी टेलीफिल्म ‘निरुपमा’ (1986) में कास्ट किया। पहली ही फिल्म में उनके काम ने दिग्गज अभिनेता सौमित्र चटर्जी को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने आगे भी उन्हें फिल्मों में लेने का सुझाव दिया।

रूपा गांगुली (Roopa Ganguly) ने बंगाली फिल्मों के साथ-साथ हिंदी सिनेमा में भी काम किया। ‘बाहर आने तक’ (1990), ‘सौगंध’ (1991), ‘प्यार का देवता’ (1991) और ‘विरोधी’ (1992) उनकी शुरुआती हिंदी फिल्में रहीं। उन्होंने कन्नड़ ब्लॉकबस्टर ‘पुलिस मट्टू दादा’ और तेलुगु फिल्म ‘इंस्पेक्टर भवानी’ में भी दमदार भूमिकाएँ निभाईं।

हालांकि टीवी का ‘महाभारत’ रूपा गांगुली (Roopa Ganguly) के करियर का सबसे चमकदार अध्याय बना। द्रौपदी के रूप में उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि वह घर-घर में पहचानी जाने लगीं। उनके अभिनय ने द्रौपदी के साहस और पीड़ा को जीवंत कर दिया, जिसका प्रभाव आज भी कायम है। निजी जीवन में रूपा ने कई संघर्ष झेले। 1992 में ध्रुव मुखर्जी से शादी के बाद उन्हें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा और उन्होंने तीन बार आत्महत्या की कोशिश भी की। लेकिन बेटे आकाश के जन्म ने उन्हें जीवन में नया उद्देश्य दिया। तलाक के बाद वह मुंबई लौटीं और करियर पर ध्यान केंद्रित किया।

रूपा गांगुली (Roopa Ganguly) अभिनय के साथ-साथ रूपा एक प्रशिक्षित रवींद्र संगीत गायिका और क्लासिकल डांसर भी हैं। उन्होंने कई फिल्मों के लिए गाया और फिल्मफेयर अवॉर्ड भी जीता। बाद में 2015 में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और भाजपा जॉइन करने के साथ राज्यसभा की सदस्य बनीं। रूपा गांगुली का सफर कला, संघर्ष और उपलब्धियों से भरा रहा है, जो उन्हें भारतीय मनोरंजन जगत और राजनीति दोनों में एक विशिष्ट पहचान दिलाता है।

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