Monday, December 1, 2025

Putin India Visit: पुतिन की भारत यात्रा, रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर रणनीतिक चर्चा

Putin India Visit: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर को दो दिवसीय भारत दौरे पर आ रहे हैं। यह यात्रा 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उनके सम्मान में स्टेट डिनर आयोजित करेंगी। पुतिन 23वें भारत-रूस वार्षिक समिट में भाग लेंगे, जो दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का मंच है। हर साल यह बैठक बारी-बारी से आयोजित होती है और इस बार भारत मेज़बान है। समिट के दौरान पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे और कई अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

रक्षा सहयोग पर विशेष फोकस

पुतिन (Putin) की यात्रा का मुख्य फोकस रक्षा समझौते पर रहेगा। रूस भारत को अपना सबसे एडवांस स्टेल्थ फाइटर जेट Su-57 देने को तैयार है। इसके अलावा S-400 मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी, भविष्य में S-500 सहयोग, ब्रह्मोस मिसाइल का नया वर्जन, और दोनों देशों की नौसेनाओं के लिए संयुक्त वॉरशिप निर्माण जैसे विषयों पर चर्चा होगी। भारत अपने वायुसेना बेड़े को मजबूत करने के लिए नए विकल्प तलाश रहा है, और यह यात्रा उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

ऊर्जा और नया भुगतान तंत्र

रूस भारत को सस्ता क्रूड ऑयल बेच रहा है, लेकिन अमेरिका और यूरोपीय देशों के दबाव के कारण भुगतान में बाधाएं आ रही हैं। इस यात्रा में दोनों देश रुपया-रूबल ट्रेड, डिजिटल पेमेंट सिस्टम, या किसी तीसरे देश के बैंक के माध्यम से नया भुगतान तंत्र विकसित करने पर सहमत हो सकते हैं। इससे व्यापार में रुकावटें दूर होंगी और ऊर्जा सहयोग को मजबूती मिलेगी। साथ ही रूस भारत को आर्कटिक क्षेत्र की ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश का अवसर भी दे सकता है।

श्रम और कौशल समझौता

रूस में युद्ध के बाद कई क्षेत्रों में कुशल वर्कर्स की कमी हो गई है। इस यात्रा में भारत और रूस के बीच एक बड़े श्रम और कौशल समझौते पर बातचीत हो सकती है। रूस चाहता है कि भारत से तकनीकी विशेषज्ञ, मेडिकल स्टाफ, इंजीनियर, और अन्य कुशल कर्मचारी वहां काम करने आएं। भारत के लिए यह एक बड़ा अवसर हो सकता है, जिससे भारतीयों को विदेश में नौकरी के नए मौके मिलेंगे और दोनों देशों के बीच मानव संसाधन सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

स्पेस, न्यूक्लियर और साइंस-टेक्नीक सहयोग

भारत और रूस स्पेस मिशन, न्यूक्लियर एनर्जी, विज्ञान-तकनीक, व्यापार, और पोर्ट्स के विकास पर भी चर्चा करेंगे। भारत रूस की मदद से कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र चला रहा है, जिसे आगे बढ़ाने पर सहमति बन सकती है। दोनों देश भविष्य की तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान में सहयोग को गहरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिससे दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को मजबूती मिलेगी।

संतुलित विदेश नीति का उदाहरण

पुतिन (Putin) की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ा हुआ है। भारत एक ओर अमेरिका, जापान और यूरोपीय देशों के साथ सहयोग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अपने पुराने मित्र रूस के साथ भी संबंध मजबूत बनाए हुए है। यह यात्रा भारत की संतुलित विदेश नीति का प्रतीक है, जिसमें रणनीतिक संतुलन और बहुपक्षीय सहयोग को प्राथमिकता दी जा रही है।

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