राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सार्वजनिक परिवहन बसों की असुरक्षित डिजाइन को लेकर देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजा है। आयोग ने बसों में ड्राइवर केबिन को पूरी तरह अलग बनाए जाने को यात्रियों के जीवन के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन बताया है। आयोग को मिली शिकायतों में कहा गया कि ऐसी बसों में आग लगने या अन्य आपात स्थिति में ड्राइवर और यात्रियों के बीच संवाद बाधित होता है, जिससे जान का खतरा बढ़ जाता है।
NHRC आयोग की पीठ, जिसकी अध्यक्षता सदस्य प्रियंक कानूनगो ने की, ने संरक्षण मानवाधिकार अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लिया और परिवहन मंत्रालय व केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान (सीआईआरटी), पुणे से दो सप्ताह में विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) मांगी है।
सीआईआरटी की रिपोर्ट में राजस्थान परिवहन विभाग के अनुरोध पर की गई जांच में कई गंभीर खामियां उजागर हुईं। हादसे वाली बस में बॉडी निर्माण के मानकों का उल्लंघन पाया गया। स्लीपर बसों में ड्राइवर पार्टिशन डोर नियमों के खिलाफ लगाया गया था। साथ ही, 12 मीटर से लंबी बसों में अनिवार्य 5 आपात निकास उपलब्ध नहीं थे।
एनएचआरसी (NHRC) आयोग ने इन खामियों को यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है और बस डिजाइन में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया है।
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