Thursday, January 29, 2026

Ajit Pawar Plane Crash: राजनीति का बड़ा सितारा बुझा-विमान हादसे में अजित पवार का निधन, महाराष्ट्र में शोक की लहर

एजेंसी/मुंबई| Ajit Pawar Plane Crash – महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी प्रमुख अजित पवार का बुधवार सुबह एक दर्दनाक विमान हादसे में निधन हो गया। वे 66 वर्ष के थे। बुधवार की सुबह 8:10 बजे मुंबई से रवाना होकर वे बारामती जा रहे थे, जहां उन्हें पंचायत चुनाव के लिए जनसभा को संबोधित करना था। लेकिन 8:45 बजे बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान उनका चार्टर्ड प्लेन क्रैश हो गया। हादसे में पवार के सुरक्षाकर्मी, दो पायलट और एक महिला क्रू मेंबर समेत कुल 5 लोगों की मौत हुई।

महाराष्ट्र एविएशन विभाग के अनुसार, सुबह कोहरे के कारण विजिबिलिटी कम थी। पायलट ने पहली बार रनवे-11 पर लैंडिंग की कोशिश की, लेकिन रनवे साफ दिखाई नहीं देने पर विमान को दोबारा ऊंचाई पर ले गया। दूसरी बार रनवे दिखने पर लैंडिंग की अनुमति दी गई, लेकिन पायलट ने इस अनुमति की रीडबैक नहीं दी। करीब 8:43 बजे विमान का संपर्क टूट गया और रनवे से 100 मीटर पहले ही जमीन से टकराकर पलट गया। टकराने के बाद विमान में भीषण आग लग गई और कई धमाके हुए। स्थानीय लोग मदद के लिए दौड़े, लेकिन आग इतनी भयानक थी कि किसी को बचाया नहीं जा सका।

हादसे के बाद महाराष्ट्र सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। अजित पवार का अंतिम संस्कार आज सुबह 11 बजे बारामती में किया जाएगा। इस दौरान उनके चाचा शरद पवार, पत्नी सुनेत्रा, बेटे और बहन सुप्रिया सुले भी मौजूद रहेंगे।

देशभर में इस हादसे पर शोक की लहर है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हादसे की जांच की मांग की है। उन्होंने एक्स पर शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि अजित पवार का असामयिक निधन बेहद दुखद है। उन्होंने आशंका जताई कि इस हादसे में साजिश हो सकती है, क्योंकि पवार हाल ही में महायुति गठबंधन से दूरी बना रहे थे। ममता ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा कि देश में कोई सुरक्षित नहीं है तथा हमें केवल सुप्रीम कोर्ट पर ही भरोसा है।

इस घटना ने महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश को झकझोर दिया है। अजित पवार लंबे समय से राज्य की राजनीति में एक अहम चेहरा रहे हैं। उनके निधन से एनसीपी और महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा खालीपन पैदा हो गया है।

जनसेवा में अग्रणी कर्मठ नेता थे अजीत पवार: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पवार महाराष्ट्र की जनता की सेवा में अग्रणी एक कर्मठ व्यक्तित्व थे, जिनका व्यापक सम्मान था। प्रशासनिक मामलों की उनकी गहरी समझ और गरीबों एवं वंचितों को सशक्त बनाने का उनका संकल्प सराहनीय था। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका असामयिक निधन अत्यंत दुखद और स्तब्ध कर देने वाला है। पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि अजीत पवार जननेता थे, जिनका जमीनी स्तर पर गहरा जुड़ाव था। उन्होंने उनके परिवार और अनगिनत प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं और अंत में “ऊँ शांति” लिखा।

1982 से 2024 तक: अजित पवार का सियासी सफर

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने राजनीति में अपने चाचा शरद पवार की छत्रछाया में कदम रखा और धीरे-धीरे खुद को राज्य की राजनीति का बड़ा चेहरा बना लिया। 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा में जन्मे अजित पवार ने प्राथमिक शिक्षा बारामती में हासिल की। कॉलेज के दौरान पिता का निधन होने के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और राजनीति में सक्रिय हो गए।

साल 1982 में उन्होंने पहली बार सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड चुनाव में हिस्सा लिया और बाद में पुणे सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने। 1991 में वे बारामती से सांसद चुने गए, लेकिन यह सीट अपने चाचा शरद पवार के लिए छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत की। 1995 में पहली बार बारामती विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने और लगातार सात बार इस सीट पर जीत दर्ज की।

अजित पवार ने राज्य सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले। उन्होंने कृषि, ऊर्जा और योजना राज्य मंत्री के रूप में काम किया। 1999 में विलासराव देशमुख की सरकार में सिंचाई मंत्री बने और बाद में ग्रामीण विकास का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। 2010 में वे पहली बार उपमुख्यमंत्री बने और इसके बाद कई बार इस पद पर रहे। 2019 में देवेंद्र फडणवीस के साथ डिप्टी सीएम बने, फिर महाविकास अघाड़ी सरकार में भी इसी पद पर रहे।

2022 के बाद उन्होंने शरद पवार से अलग अपनी राजनीतिक राह बनाई और 2023 में एनसीपी पर कब्जा करते हुए बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में शामिल हो गए। 2024 में वे छठी बार डिप्टी सीएम बने। अपने राजनीतिक कौशल और संगठन क्षमता से उन्होंने एनसीपी को महाराष्ट्र में मजबूत जनाधार दिया।

भारत की राजनीति को झकझोरने वाले विमान हादसे

भारत ने समय-समय पर विमान और हेलीकॉप्टर हादसों में अपने कई कद्दावर नेताओं को खोया है। ये घटनाएँ केवल दुर्घटनाएँ नहीं रहीं, बल्कि देश की राजनीति, प्रशासन और जनता की भावनाओं पर गहरा असर छोड़ गईं। बुधवार सुबह महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार का चार्टर्ड प्लेन क्रैश हो गया, जिससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई। इस खबर ने महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश को शोक में डुबो दिया।

भारत के इतिहास में कई बड़े नेता ऐसे हादसों का शिकार हुए। 23 जून 1980 को कांग्रेस नेता संजय गांधी की दिल्ली में विमान दुर्घटना में मौत हो गई। उन्हें इंदिरा गांधी का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जा रहा था। उनकी असामयिक मृत्यु ने कांग्रेस और देश की राजनीति की दिशा बदल दी।

30 सितंबर 2001 को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता माधवराव सिंधिया का निजी विमान उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में दुर्घटनाग्रस्त हुआ। इस हादसे में सभी यात्रियों की मौत हो गई। सिंधिया को एक दूरदर्शी और जनता से जुड़े नेता के रूप में जाना जाता था।

2002 में आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष जी.एम.सी. बालयोगी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हुई। खराब मौसम इस हादसे की वजह बना।

2 सितंबर 2009 को आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी का हेलीकॉप्टर नल्लमाला जंगल में दुर्घटनाग्रस्त हुआ। उनकी मौत ने राज्य की राजनीति को अस्थिर कर दिया।

8 दिसंबर 2021 को तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हेलीकॉप्टर हादसे में भारत के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और 11 अन्य सैन्य अधिकारियों की मौत हो गई। यह हादसा भारत के सैन्य इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है।

इन घटनाओं ने बार-बार सवाल उठाए हैं कि क्या वीआईपी उड़ानों के लिए पर्याप्त सुरक्षा मानक मौजूद हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में वीआईपी हेलीकॉप्टर और विमान उड़ानों के लिए और सख्त नियम, आधुनिक तकनीक और पारदर्शी जांच प्रणाली की जरूरत है।

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