Wednesday, February 4, 2026

Doomsday Clock 2026: डूम्सडे क्लॉक की टिक-टिक में छिपी अंतिम चेतावनी, वैज्ञानिकों ने कहा-अब भी संभलने का समय है

एजेंसी/न्यूयॉर्क| Doomsday Clock 2026 – दुनिया भर में जारी युद्ध, सैन्य तनाव और जलवायु संकट के बीच मानवता को लेकर अब तक की सबसे डरावनी चेतावनी सामने आई है। परमाणु वैज्ञानिकों के एक समूह ने ‘डूम्सडे क्लॉक’ (विनाश की घड़ी) की सुइयों को आधी रात से महज 85 सेकंड पहले पर सेट कर दिया है। यह घड़ी 1947 से मानव सभ्यता के विनाश के जोखिम को दर्शाती है, और इस बार यह अब तक की सबसे खतरनाक स्थिति में पहुंच गई है।

पिछले वर्ष यह समय 89 सेकंड पर था, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान-अमेरिका तनाव, और परमाणु हथियारों की नई होड़ ने इसे चार सेकंड और आगे बढ़ा दिया है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह अंतर मामूली नहीं, बल्कि एक वैश्विक आपातकाल का संकेत है।

यह घड़ी कोई ज्योतिषीय भविष्यवाणी नहीं, बल्कि वैज्ञानिक विश्लेषण है जो बताता है कि वैश्विक नेतृत्व की विफलता हमें किस दिशा में ले जा रही है। यूक्रेन और मध्य पूर्व में चल रहे युद्धों ने न केवल हजारों जानें ली हैं, बल्कि परमाणु संपन्न देशों के बीच सीधे टकराव का खतरा भी बढ़ा दिया है।

परमाणु नियंत्रण संधियाँ कमजोर पड़ रही हैं और देश अपनी रक्षा के नाम पर विनाशकारी हथियारों का भंडार बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही, जलवायु परिवर्तन अब एक अस्तित्वगत संकट बन चुका है, जिस पर दुनिया के बड़े देश ठोस कार्रवाई करने में विफल रहे हैं।

एक नया खतरा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का बेकाबू सैन्य उपयोग है। वैज्ञानिकों का मानना है कि एआई के जरिए फेक न्यूज और सूचना युद्ध बढ़ रहे हैं, जिससे देशों के बीच गलतफहमियां और युद्ध की आशंका बढ़ रही है।

इसके अलावा, जैविक खतरों और भविष्य की महामारियों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग की कमी भी इस घड़ी की सुइयों को आगे धकेलने का बड़ा कारण बनी है।

बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स ने स्पष्ट किया है कि यह समय डराने के लिए नहीं, बल्कि दुनिया को जगाने के लिए तय किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परमाणु शक्तियाँ नए समझौतों की मेज पर आएं, एआई के सैन्य उपयोग पर अंतरराष्ट्रीय नियम बनें और जलवायु संकट को राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाए, तो इन सुइयों को पीछे किया जा सकता है।

फिलहाल, यह घड़ी एक अंतिम चेतावनी की तरह टिक-टिक कर रही है-अब भी संभलने का मौका है, वरना देरी मानवता के लिए भारी पड़ सकती है।

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