Wednesday, February 4, 2026

Budget 2026-27 Highlights: टैक्सपेयर्स के लिए सबसे बड़ी राहत, जेल की जगह सिर्फ जुर्माना

एजेंसी/नई दिल्‍ली| Union Budget 2026-27 Highlights – केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश किया। यह बजट न केवल कर सुधारों और आर्थिक नीतियों के कारण चर्चा में है, बल्कि इसमें आम करदाताओं, उद्योग जगत, एमएसएमई, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई बड़े ऐलान किए गए हैं।

टैक्सपेयर्स को राहत: जेल नहीं, सिर्फ जुर्माना

बजट की सबसे बड़ी घोषणा यह रही कि अब इनकम टैक्स छिपाने पर करदाताओं को जेल नहीं होगी। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार करदाताओं पर भरोसा जताने की नीति पर काम कर रही है। नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत, 1 अप्रैल 2026 से टैक्स गड़बड़ी पाए जाने पर केवल जुर्माना भरना होगा। साथ ही, विदेशों में अघोषित संपत्ति रखने वालों को 6 महीने की डिस्क्लोजर स्कीम का अवसर दिया गया है।

विदेश यात्रा और पढ़ाई पर फायदा

विदेश यात्रा पैकेज और शिक्षा खर्च पर टीसीएस दर घटाकर 2% कर दी गई है। पहले यह दर 5% से 20% तक थी। अब चाहे स्वास्थ्य हो, शिक्षा हो या टूर पैकेज, करदाताओं को केवल 2% टीसीएस देना होगा। यह आम आदमी की जेब पर बोझ कम करेगा।

प्रॉपर्टी खरीद आसान

एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदने पर अब टैन नंबर की आवश्यकता नहीं होगी। खरीदार सीधे टीडीएस काट सकेंगे। निवेशकों के लिए फॉर्म 15जी और 15एच की प्रक्रिया भी सरल की गई है। डिपॉजिटरी अब इन फॉर्म्स को स्वीकार कर कंपनियों को भेज सकेगी।

एमएसएमई पर जोर

बजट में एमएसएमई सेक्टर को 10,000 करोड़ रुपये का पैकेज दिया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि एमएसएमई रोजगार सृजन, नवाचार और निर्यात वृद्धि का प्रमुख आधार है। पुराने औद्योगिक क्षेत्रों को पुनर्जीवित करने के लिए 7,000 करोड़ रुपये और हथकरघा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए महात्मा गांधी हैंडलूम योजना शुरू की गई है।

औद्योगिक और मैन्युफैक्चरिंग सुधार

इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 40,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक सप्लाई चेन हब बनाना है। बायोफार्मा और उभरते औद्योगिक क्षेत्रों के लिए नई नीतियां तैयार की जाएंगी।

हाईस्पीड रेल और कॉरिडोर

बजट में तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और बंगाल को हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का तोहफा दिया गया। चेन्नई-हैदराबाद और चेन्नई-बेंगलुरु के बीच हाईस्पीड लिंक बनेगा। दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी प्रस्तावित है।

मिनरल और रेयर अर्थ कॉरिडोर

ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में डेडिकेटेड मिनरल पार्क और रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाए जाएंगे। इससे माइनिंग, प्रोसेसिंग और रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा।

कृषि और नारियल संवर्धन

दक्षिण भारत में नारियल उत्पादन बढ़ाने के लिए कोकोनट प्रमोशन स्कीम शुरू की गई है। बेकार पेड़ों की जगह नई किस्में लगाई जाएंगी। काजू और कोको के लिए विशेष प्रोग्राम का प्रस्ताव है, ताकि भारत 2030 तक प्रीमियम ग्लोबल ब्रांड बना सके।

शिक्षा और छात्राओं पर ध्यान

15,000 विद्यालयों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी कंटेंट लैब्स स्थापित होंगी। प्रत्येक जिले में छात्राओं के लिए छात्रावास बनाए जाएंगे। पर्यटन क्षेत्र में 12-सप्ताह का प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू होगा, जिससे 10,000 गाइडों का कौशल उन्नयन होगा।

कर सुधार और सीमा शुल्क

निजी उपयोग के लिए आयातित वस्तुओं पर शुल्क दर 20% से घटाकर 10% की गई है। 17 औषधियों पर सीमा शुल्क छूट दी गई है। कैंसर और अन्य असाधारण रोगों की दवाओं पर भी राहत दी गई है।

राजकोषीय स्थिति

ऋण-से-जीडीपी अनुपात 2026-27 में 55.6% रहने का अनुमान है। राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3% होगा। गैर-ऋण प्राप्तियां 36.5 लाख करोड़ रुपये और कुल व्यय 53.5 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। सकल बाजार उधारी 17.2 लाख करोड़ रुपये होगी।

पर्यटन और उद्योग विकास पर बजट का फोकस

केंद्रीय बजट 2026-27 में आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को विशेष सौगात दी। उन्होंने पुलिकट झील के किनारे बर्डिंग ट्रेल बनाने की घोषणा की, जिससे प्रकृति प्रेमियों और पक्षी अवलोकनकर्ताओं को उनके प्राकृतिक आवास में पक्षियों को देखने और अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।

इसके साथ ही पूर्वोदय राज्यों के लिए ईस्ट कोस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें दुर्गापुर को प्रमुख नोड बनाया जाएगा। बजट में पांच पर्यटन स्थलों के विकास और 4,000 ई-बसों को चलाने की भी घोषणा की गई है।

नॉर्थ ईस्ट क्षेत्र में सरकार ने बुद्ध सर्किट बनाने का ऐलान किया है। अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में मंदिरों और मठों का संरक्षण, तीर्थयात्रा केंद्र और सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

मछुआरों के लिए भी राहत दी गई है। अब भारतीय सीमा वाले समुद्री इलाकों या खुले समुद्र में पकड़ी गई मछलियों पर कोई टैक्स या शुल्क नहीं लगेगा। यदि मछुआरे अपनी पकड़ को विदेशी बंदरगाह पर उतारते हैं, तो इसे निर्यात माना जाएगा। इस योजना से विशेष रूप से तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के मछुआरों को लाभ होगा।

 

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