एजेंसी/वॉशिंगटन| Postpartum Period Delay – डिलीवरी के बाद पीरियड्स का देर से आना एक सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे लेकर महिलाओं को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार, प्रसव के बाद 6 हफ्तों से लेकर 12 महीनों तक पीरियड्स न आना सामान्य माना जाता है। विशेष रूप से वे महिलाएं जो अपने बच्चे को पूरी तरह से स्तनपान कराती हैं, उनमें यह अवधि और लंबी हो सकती है-कुछ मामलों में 18 महीने तक भी।
हालिया सर्वे के मुताबिक, भारत में आधी से ज्यादा महिलाओं को डिलीवरी के 6 महीने के भीतर पहला पीरियड आ जाता है, जबकि बाकी महिलाओं में यह समय इससे अधिक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पीरियड्स की वापसी कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें सबसे प्रमुख है प्रोलैक्टिन हार्मोन, जो दूध बनाने की प्रक्रिया में सक्रिय होता है और ओव्यूलेशन को दबा देता है।
इसके अलावा, मानसिक तनाव, नींद की कमी और शारीरिक थकान भी हार्मोनल संतुलन को प्रभावित करते हैं, जिससे पीरियड्स की टाइमिंग बदल सकती है। यह प्रक्रिया शरीर को अगली प्रेग्नेंसी के लिए तैयार करने का एक प्राकृतिक तरीका है।
पीरियड्स को सामान्य करने के लिए संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली बेहद जरूरी है। आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर भोजन-जैसे हरी सब्जियां, फल, दालें, नट्स और पर्याप्त पानी-शरीर की रिकवरी में मदद करता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थ जैसे अलसी और अखरोट हार्मोन बैलेंस में सहायक होते हैं।
साथ ही, हल्की एक्सरसाइज, पोस्टनेटल योग और स्ट्रेचिंग से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और मूड भी सुधरता है। तनाव कम रखना और पर्याप्त आराम लेना इस दौरान बेहद अहम है।
हालांकि, यदि पीरियड्स बहुत लंबे समय तक न आएं या अत्यधिक ब्लीडिंग, असहनीय दर्द, चक्कर या कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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