Saturday, February 7, 2026

Ashta Kumbhaka Pranayama: अष्ट कुंभक-आठ प्राणायाम तकनीकों का अद्भुत संगम

एजेंसी/नई दिल्‍ली| Ashta Kumbhaka Pranayama – योग की प्राचीन परंपरा में वर्णित अष्ट कुंभक एक विशिष्ट प्राणायाम अभ्यास है, जिसमें आठ उन्नत तकनीकों का समावेश होता है। इसका उल्लेख हठ योग प्रदीपिका जैसे ग्रंथों में मिलता है, जहां इसे श्वसन क्षमता बढ़ाने और सूक्ष्म ऊर्जाओं को जागृत करने वाला अभ्यास बताया गया है।

मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन का भी सशक्त माध्यम है। अष्ट कुंभक में सूर्य भेदन, उज्जायी, सीतकारी, शीतली, भस्त्रिका, भ्रामरी, मूर्छा और प्लाविनी प्राणायाम शामिल हैं। इन तकनीकों का शरीर और मन पर अलग-अलग सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सूर्य भेदन और भस्त्रिका ऊर्जा का संचार करते हैं, शीतली और सीतकारी शरीर को शीतलता प्रदान करते हैं, उज्जायी और भ्रामरी मानसिक एकाग्रता बढ़ाते हैं, जबकि मूर्छा और प्लाविनी उन्नत साधनाएं हैं जिन्हें विशेषज्ञ मार्गदर्शन में ही करना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि अष्ट कुंभक का अभ्यास करने से पहले शांत और स्वच्छ स्थान का चयन कर ध्यान करना आवश्यक है। इसके बाद आठों प्राणायाम तकनीकों का क्रमबद्ध अभ्यास किया जाता है। प्रत्येक प्राणायाम को सामान्यतः 5 से 10 बार दोहराने की सलाह दी जाती है। इस दौरान श्वास-प्रश्वास की सही विधि और शरीर की सहज स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है।

नियमित अभ्यास से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। यह तनाव और चिंता को कम करता है, मानसिक स्थिरता को बढ़ावा देता है और शारीरिक शक्ति व सहनशक्ति को मजबूत बनाता है। साथ ही श्वसन प्रणाली बेहतर होती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है और मेटाबॉलिज्म सक्रिय रहता है, जिससे वजन नियंत्रण में भी मदद मिलती है। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि किसी भी स्वास्थ्य समस्या से ग्रस्त व्यक्ति को इसे अपनाने से पहले चिकित्सकीय या योग विशेषज्ञ की सलाह लेना चाहिए।

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