एजेंसी/नई दिल्ली| ED Raids Before Elections-पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की बढ़ती सक्रियता को लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं। ताजा मामला कोलकाता में इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पीएसी) से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी का है, जिसने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और ईडी को आमने-सामने ला दिया है। बंगाल में मार्च-अप्रैल 2026 में चुनाव होने हैं और ठीक उससे पहले यह कार्रवाई चर्चा का विषय बन गई है।
ईडी ने 8 जनवरी को आई-पीएसी के कार्यालय और इसके निर्देशक प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कोयला तस्करी से जुड़े 2,742 करोड़ रुपए के मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में हुई। सीबीआई ने इस मामले में 27 नवंबर 2020 को एफआईआर दर्ज की थी और ईडी ने 28 नवंबर 2020 को जांच शुरू की थी। मामला अब पांचवें साल में है, लेकिन पहली बड़ी कार्रवाई चुनाव से महज कुछ महीने पहले सामने आई। आरोप है कि हवाला के जरिए 20 करोड़ रुपए आई-पीएसी तक पहुंचे। ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि राज्य सरकार ने जांच में बाधा डाली और सबूत नष्ट किए।
यह पहली बार नहीं है जब चुनाव से पहले ईडी की कार्रवाई ने राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित किया हो। पिछले चार सालों में झारखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र में भी चुनाव से ठीक पहले ईडी की बड़ी कार्रवाइयां हुईं।
दिल्ली में शराब नीति मामला 2022 में शुरू हुआ। फरवरी 2023 में मनीष सिसोदिया और मार्च 2024 में तत्कालीन सीएम अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार हुए। फरवरी 2025 में चुनाव हुए और बीजेपी सत्ता में आई।
झारखंड में अगस्त 2023 में भूमि और मनी-लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज हुआ। दिसंबर में पूछताछ और जनवरी 2024 में सीएम हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी हुई। उन्हें पद छोड़ना पड़ा, लेकिन नवंबर 2024 के चुनाव में उनकी पार्टी जीतकर फिर सत्ता में लौटी।
महाराष्ट्र में 2021 के मामले में चुनाव से छह दिन पहले नवंबर 2024 में ईडी ने महाराष्ट्र और गुजरात में 23 स्थानों पर छापेमारी की। व्यापारी सिराज अहमद हारुन मेमन से जुड़े 125 करोड़ रुपए के मनी-लॉन्ड्रिंग और चुनावी फंडिंग ट्रेल की जांच हुई। चुनाव से ठीक पहले विपक्षी दलों पर नोट और वोट जिहाद के आरोप लगे और बीजेपी ने जीत हासिल की।
इस साल बंगाल के अलावा तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में भी चुनाव होने हैं। इन राज्यों में ईडी ने पुराने मामलों की फाइलें खोलना शुरू कर दी हैं। तमिलनाडु में शराब और शेल कंपनियों से जुड़े मामले डीएमके के लिए चुनौती बने हैं। केरल में सोना तस्करी और सहकारी बैंक मामलों से एलडीएफ सरकार घिरी हुई है। असम में विपक्षी कांग्रेस और एआईयूडीएफ नेताओं पर कार्रवाई का डर चुनावी फंडिंग नेटवर्क पर असर डाल रहा है। पुडुचेरी में कारोबारी और राजनीतिक गठजोड़ पर एजेंसी की नजर है।
हालांकि ईडी का कहना है कि उसका काम केवल कानून के तहत जांच करना है और चुनाव से उसका कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन बार-बार चुनाव से पहले की गई कार्रवाइयों ने राजनीतिक हलकों में एजेंसी की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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