Sunday, February 8, 2026

India Russia Oil Trade: भारत की तेल नीति स्वतंत्र और संतुलित-क्रेमलिन

एजेंसी/मॉस्को| India Russia Oil Trade – भारत, अमेरिका और रूस के बीच तेल व्यापार को लेकर जारी बयानबाजी के बीच रूस ने अपनी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट कर दी है। रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत द्वारा रूसी हाइड्रोकार्बन (तेल और गैस) की खरीद न केवल दोनों देशों के द्विपक्षीय हितों के लिए लाभकारी है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए भी आवश्यक कदम है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में भारत और रूस की साझेदारी दशकों पुरानी और भरोसेमंद है, जो मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में और भी प्रासंगिक हो गई है।

यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया दावे के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा और वेनेजुएला जैसे विकल्पों पर विचार करेगा। हालांकि, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि रूस कभी भी भारत का एकमात्र तेल आपूर्तिकर्ता नहीं रहा है। भारत अपनी विशाल ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए हमेशा से विभिन्न देशों से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदता रहा है।

रूस ने स्पष्ट किया कि भारत की तेल खरीद नीति पूरी तरह स्वतंत्र है और वह अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेता है। मंत्रालय ने कहा कि भारत का रूस के साथ ऊर्जा व्यापार अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। क्रेमलिन ने विश्वास जताया कि भविष्य में भी तेल, गैस और अन्य ऊर्जा संसाधनों में यह सहयोग बिना किसी बाधा के जारी रहेगा।

रूस ने यह भी कहा कि भारत की ओर से आयात रोकने के संबंध में उन्हें कोई आधिकारिक जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। उल्लेखनीय है कि यूक्रेन संघर्ष के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने अपने नागरिकों को महंगाई से राहत देने के लिए रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदना जारी रखा था।

व्हाइट हाउस और राष्ट्रपति ट्रंप लगातार संकेत दे रहे हैं कि भारत अब अमेरिकी खेमे के साथ व्यापारिक हितों को प्राथमिकता देगा। लेकिन रूस के इस ताजा बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह भारत की कूटनीतिक मजबूरियों और रणनीतिक स्वायत्तता को समझता है। रूस ने इसे सामान्य व्यापारिक प्रक्रिया करार देकर उन दावों को खारिज कर दिया है जो भारत-रूस संबंधों में दरार की ओर इशारा कर रहे थे। फिलहाल, भारत अपनी नेशन फर्स्ट नीति पर कायम रहते हुए दोनों महाशक्तियों के साथ संतुलन बनाए हुए है।

 

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