Tuesday, February 10, 2026

Joginder Singh CBI Director: राजनीतिक ताकतों से टकराने वाला सीबीआई का टाइगर

एजेंसी/नई दिल्ली| Joginder Singh CBI Director – भारतीय पुलिस सेवा और जांच एजेंसियों के इतिहास में 1961 बैच के कर्नाटक कैडर के आईपीएस अधिकारी जोगिंदर सिंह का नाम एक ऐसे अध्याय के रूप में दर्ज है, जिसने यह साबित किया कि यदि एक अफसर ठान ले, तो सत्ता के गलियारों में बैठे दिग्गजों की नींद उड़ सकती है। 90 के दशक में अपनी बेबाकी और निडरता के कारण वे “टाइगर” के नाम से मशहूर हुए। सिंह सीबीआई के 17वें डायरेक्टर थे और उनके कार्यकाल ने भारतीय नौकरशाही को एक ऐसा दौर दिखाया जब एक मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी की फाइल पर साइन करने की कीमत एक डायरेक्टर को अपनी कुर्सी गंवाकर चुकानी पड़ी।

उनके करियर का सबसे चर्चित मोड़ 30 जून 1997 को आया। सिंह पेरिस से दिल्ली लौट रहे थे और उन्हें इस बात का आभास भी नहीं था कि दिल्ली में उनके तबादले का आदेश टाइप हो चुका है। जब वे 1 जुलाई की सुबह दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरे, तो एक कनिष्ठ अधिकारी ने उन्हें बताया कि अब वे सीबीआई डायरेक्टर नहीं रहे। सरकार ने उन्हें तत्काल गृह मंत्रालय के पेंशन और स्वतंत्रता सेनानी विभाग में भेज दिया। यह कदम चारा घोटाले की जांच के दौरान उठाया गया था।

950 करोड़ रुपये के इस घोटाले में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव मुख्य आरोपी थे। सिंह ने बिना किसी राजनीतिक दबाव की परवाह किए चार्जशीट दाखिल करने और गिरफ्तारी को हरी झंडी दे दी थी। उन्होंने अपने अधिकारी यू.एन. बिस्वास को पूरी छूट दी थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री आई.के. गुजराल अपनी सरकार बचाने के लिए लालू यादव को नाराज नहीं करना चाहते थे, लेकिन सिंह के सख्त रुख ने सरकार को मुश्किल में डाल दिया।

सिंह का मीडिया के प्रति खुला रवैया भी सरकार की नाराजगी का कारण बना। वे अक्सर प्रेस को बयान दे देते थे, जिससे सरकार असहज हो जाती थी। इसके अलावा उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी की संपत्तियों की जांच शुरू करवाई और उनके घर जाकर पूछताछ की। बोफोर्स मामले में राजीव गांधी का नाम चार्जशीट के ड्राफ्ट में शामिल होने की खबरों ने राजनीतिक दबाव और बढ़ा दिया। अंततः कांग्रेस और सहयोगियों के दबाव में सरकार ने उन्हें हटाने का फैसला कर लिया।

रिटायरमेंट के बाद जोगिंदर सिंह ने “इनसाइड सीबीआई” जैसी किताबें लिखीं, जिनमें उन्होंने खुलासा किया कि कैसे लालू यादव को बचाने के लिए पीएमओ से उन पर दबाव डाला गया था। उन्होंने बोफोर्स केस, यूरिया घोटाला और जैन हवाला डायरी जैसे बड़े मामलों की चुनौतियों पर भी विस्तार से लिखा।

उनका कार्यकाल भले ही छोटा रहा, लेकिन “टाइगर” के रूप में उनकी पहचान आज भी उन अधिकारियों के लिए प्रेरणा है जो राजनीतिक दबाव के आगे झुकने से इनकार करते हैं।

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