ऐजेंसी/इंदौर/भापाल| Justice for victims-इंदौर की स्वच्छता की साख भागीरथपुरा की दूषित गलियों में सवालों के घेरे में आ गई है। जिस शहर को दुनिया क्लीन सिटी का रोल मॉडल मानती है, वहां पेयजल पाइपलाइनों में गटर का मलबा घुल जाने से ई-कोलाई बैक्टीरिया फैल गया। शुक्रवार को 68 वर्षीय गीताबाई की मौत के साथ ही इस त्रासदी ने अब तक 15 मासूम जिंदगियों को लील लिया है। लैब रिपोर्ट ने पुष्टि कर दी है कि नलों से जीवन नहीं, बल्कि मौत बह रही थी।
जनता के आक्रोश और मौतों के बढ़ते आंकड़ों ने भोपाल तक हड़कंप मचा दिया। जबलपुर से लौटते ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देर रात प्रशासनिक सर्जरी करते हुए कड़ा रुख अपनाया। इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव को पद से हटाकर मंत्रालय अटैच कर दिया गया। अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि सुशासन में जनता की जान से समझौता करने वाले किसी भी अधिकारी के लिए कोई जगह नहीं है।
उमा भारती और राहुल गांधी का तीखा प्रहार
इस त्रासदी ने भाजपा के भीतर भी दरारें पैदा कर दी हैं। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपनी ही सरकार को नैतिकता के कटघरे में खड़ा करते हुए तीखा प्रहार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जनता जहर पी रही थी, तब जिम्मेदार अधिकारी बिसलेरी की बोतलें क्यों गटागट कर रहे थे? उन्होंने 2 लाख रुपये के मुआवजे को ऊंट के मुंह में जीरा बताते हुए इसे प्रायश्चित का समय बताया। वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश को कुप्रशासन का केंद्र बताते हुए इसे जीवन के अधिकार की हत्या करार दिया। उनका आरोप था कि हफ्तों से आ रही शिकायतों को दबाकर गरीबों को मौत के मुंह में धकेला गया।
सरकारी आंकड़ों में सिर्फ 4 मौतें
मौतों के आंकड़ों को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच विरोधाभास ने हाई कोर्ट को भी नाराज कर दिया है। सरकारी आंकड़ा मात्र 4 मौतों का है, महापौर ने 10 मौतों की स्वीकारोक्ति की है, जबकि स्थानीय दावा 15 से अधिक मौतों का है। इस त्रासदी की सबसे मर्मस्पर्शी तस्वीर 6 माह के अव्यान साहू की है, जो 10 साल की मन्नत के बाद जन्मा था। ज़हरीले पानी ने उस नन्हीं जान को छीन लिया। शोकाकुल पिता ने कहा–हमें 2 करोड़ नहीं, इंसाफ चाहिए; क्या पैसा मेरा बच्चा लौटा पाएगा?
इमरजेंसी प्रोटोकॉल जारी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस घटना से सबक लेते हुए पूरे मध्य प्रदेश के लिए इमरजेंसी प्रोटोकॉल जारी कर दिया है। 48 घंटे में 20 वर्ष से पुरानी पाइपलाइनों का चिन्हांकन और मरम्मत पूरी करने का अल्टीमेटम दिया गया है। सभी जल शोधन संयंत्रों की 7 दिनों के भीतर गहन सफाई सुनिश्चित करने और जल प्रदाय की शिकायतों को इमरजेंसी श्रेणी में रखकर तत्काल समाधान करने का आदेश दिया गया है।

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