एजेंसी/टोक्यो| Rare Earth Elements Japan – जापान ने दुर्लभ खनिजों की खोज में एक बड़ी सफलता हासिल की है। जापान के वैज्ञानिकों ने मिनमिटोरिशिमा (मार्कस द्वीप) के पास गहरे समुद्र के तल से रेयर अर्थ रिच मड यानी दुर्लभ खनिजों से भरपूर कीचड़ को सफलतापूर्वक ड्रिल करके निकाला है। यह खोज न केवल तकनीकी दृष्टि से ऐतिहासिक है, बल्कि जापान की चीन पर निर्भरता को कम करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने बताया कि ड्रिलिंग जहाज चिक्यू ने 6,000 मीटर (19,700 फीट) की गहराई से तलछट इकट्ठा की। इतनी गहराई से दुर्लभ खनिजों का निष्कर्षण दुनिया में पहली बार हुआ है। यह जापान में घरेलू स्तर पर रेयर अर्थ के औद्योगीकरण की दिशा में पहला प्रयास है।
12 जनवरी को टोक्यो से रवाना हुआ जहाज 1,900 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित मिनमिटोरिशिमा द्वीप पहुंचा। 30 जनवरी को रिकवरी ऑपरेशन शुरू हुआ और 1 फरवरी को इनोवेटिव ओशन डेवलपमेंट ने निष्कर्षण की सफलता की घोषणा की।
शुरुआती जांच में पता चला है कि निकाले गए कीचड़ में डिस्प्रोसियम, नियोडिमियम, गैडोलिनियम और टर्बियम जैसे महत्वपूर्ण तत्व मौजूद हैं। ये तत्व इलेक्ट्रिक वाहन मोटर्स, मेडिकल इमेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा तकनीक में उपयोग किए जाते हैं।
टर्बियम और मोनाजाइट के नमूनों को वैज्ञानिक जांच के लिए पेरिस की लैब भेजा गया है। जापान एजेंसी फॉर मरीन-अर्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के अनुसार, निष्कर्षण तीन अलग-अलग स्थानों पर किया गया। जहाज के 15 फरवरी को शिमिजु बंदरगाह लौटने के बाद रासायनिक और व्यावसायिक विश्लेषण किया जाएगा।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दुर्लभ पृथ्वी भंडार की कुल मात्रा और उनकी आर्थिक व्यवहार्यता को निर्धारित करने के लिए और रिसर्च जरूरी है। यदि तकनीकी बाधाएं नहीं आतीं, तो जापान अगले साल फरवरी में बड़े पैमाने पर समुद्री खनन परीक्षण शुरू कर सकता है।
इस खोज से जापान को चीन के निर्यात प्रतिबंधों से राहत मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में चीन वैश्विक रेयर अर्थ सप्लाई पर हावी है, लेकिन जापान की यह पहल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को संतुलित करने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है।

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