एजेंसी/गिर सोमनाथ| Somnath Swabhiman Parv-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अरब सागर के तट पर स्थित भगवान सोमनाथ मंदिर में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में शामिल होकर भारतीय संस्कृति की अजेयता और आस्था का जयघोष किया। यह आयोजन मंदिर पर विधर्मी आक्रांताओं के हमले के एक हजार वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की अडिग आस्था, स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है।
उन्होंने शौर्य सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले एक हजार वर्षों का इतिहास हमें आने वाले दशकों तक भारत के भविष्य निर्माण की सीख देता है। सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का नहीं, बल्कि विजय, धैर्य, त्याग और पुनर्निर्माण का इतिहास है। प्रधानमंत्री ने कहा कि तलवार की नोक पर कभी किसी का दिल नहीं जीता जा सकता। जो सभ्यताएं दूसरों को मिलाकर आगे बढ़ना चाहती हैं, वे स्वयं समय में खो जाती हैं।
मोदी ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व विध्वंस के स्मरण के लिए नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की अडिग यात्रा और पुनर्निर्माण का उत्सव है। जिस प्रकार सोमनाथ पर लगातार आक्रमण हुए, उसी प्रकार विदेशी ताकतों ने भारत को खत्म करने की कोशिशें कीं, लेकिन न तो सोमनाथ नष्ट हुआ और न ही भारत। क्योंकि भारत की आत्मा और उसकी आस्था के केंद्र अविनाशी हैं।
समारोह के दूसरे दिन प्रधानमंत्री ने भगवान सोमनाथ के समक्ष विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की। इससे पूर्व वे मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी और मंत्री जीतू वाघाणी के साथ शौर्य यात्रा में शामिल हुए। 108 घोड़ों और केसरी साफाधारी घुड़सवारों की कूच के साथ निकली इस यात्रा में प्रधानमंत्री ने भक्तों का अभिवादन स्वीकार किया। उन्होंने वीर हमीरजी और सरदार पटेल की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के इतिहास में इतनी सदियों तक अडिग आस्था और संस्कृति का उदाहरण बहुत कम मिलता है। हमारा कर्तव्य है कि आने वाली पीढ़ियां इस विरासत को गौरव के साथ आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि गजनवी से लेकर औरंगजेब तक अनेक आक्रांताओं ने सोमनाथ पर हमला किया, लेकिन वे सनातन परंपरा की आत्मा को नहीं समझ पाए। ‘सोमनाथ’ नाम में ही ‘सोम’ यानी अमृत जुड़ा हुआ है और यहां स्थित महादेव चैतन्य, कल्याणकारी और अविनाशी शक्ति का प्रतीक हैं।
मोदी ने कहा कि सोमनाथ में विराजमान भगवान शिव ‘मृत्युंजय’ हैं, जिन्होंने मृत्यु को जीत लिया है और जो सृष्टि के सृजन, पालन और लय के आधार हैं। भारत की आस्था ऐसी है कि यहां कण-कण में शिव का दर्शन होता है, इसलिए कोई भी आक्रमण इस चेतना को नष्ट नहीं कर पाया। उन्होंने कहा कि समय चक्र साक्षी है कि जो ताकतें सोमनाथ को नष्ट करने आईं, वे इतिहास के पन्नों में सिमट गईं, जबकि सोमनाथ मंदिर आज भी समुद्र किनारे गगनचुंबी धर्म-ध्वजा के साथ अडिग खड़ा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल भूतकाल का गौरव नहीं, बल्कि तीर्थ परंपरा को भविष्य के लिए जीवंत रखने का अवसर है। उन्होंने आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा मंदिर के पुनर्निर्माण के संकल्प को राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक बताया। 1951 में पुनर्निर्माण के समय अनेक बाधाएं आईं, लेकिन महाराजा दिग्विजय सिंह जैसे महानुभावों ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर योगदान दिया।
मोदी ने चेतावनी दी कि आज भी देश विरोधी और विभाजनकारी ताकतें नए स्वरूपों में सक्रिय हैं। उन्होंने देशवासियों से एकता, सतर्कता और शक्ति के साथ आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि अपनी आस्था और विरासत का संरक्षण ही भारत को आने वाले हजार वर्षों तक सशक्त बनाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 1000 वर्ष पहले आक्रांताओं को लगा था कि उन्होंने हमें जीत लिया, लेकिन आज सोमनाथ मंदिर पर लहरा रही ध्वजा भारत की अजेय शक्ति का प्रमाण है। यह ध्वजा पूरी सृष्टि को भारत की संकल्प शक्ति का संदेश दे रही है।
शौर्य सभा में उन्होंने कहा कि हमारी आस्था और श्रद्धा की रक्षा के लिए पूर्वजों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया। प्रभास पाटन की भूमि पूर्वजों के शौर्य और पराक्रम की साक्षी रही है। इसी कारण आज हमारी संस्कृति अखंड है।
मोदी ने भारत के लिए अगले एक हजार वर्षों का विराट स्वप्न प्रस्तुत किया और ‘देव से देश’ के विजन के साथ आगे बढ़ने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण करोड़ों देशवासियों में नया आत्मविश्वास जगा रहा है। आज विकसित भारत को लेकर नागरिकों में दृढ़ विश्वास है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 140 करोड़ भारतीय भविष्य के लक्ष्यों को लेकर संकल्पबद्ध हैं। भारत गरीबी के खिलाफ लड़ाई में विजय प्राप्त करेगा और विकास की नई उपलब्धियां हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य के लिए तैयार है।
सोमनाथ मंदिर का सांस्कृतिक विस्तार, सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना और माधवपुर मेले की लोकप्रियता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ‘विरासत से विकास’ की प्रेरणा लेकर आगे बढ़ रहा है। सोमनाथ में ‘विकास भी, विरासत भी’ की भावना साकार हो रही है।
उन्होंने कहा कि गिर के शेरों के संरक्षण से क्षेत्र का प्राकृतिक आकर्षण बढ़ा है। प्रभास पाटन क्षेत्र में विकास के नए आयाम सृजित हो रहे हैं। केशोद हवाई अड्डे का विस्तार और अहमदाबाद-वेरावल वंदे भारत ट्रेन से तीर्थयात्रियों का समय बच रहा है। यात्राधाम सर्किट के विकास से आध्यात्मिक पर्यटन को नई गति मिल रही है।
अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व विरासत, अध्यात्म और गौरव का संगम है। यह आयोजन आत्मगौरव की अनुभूति कराता है। महादेव के सान्निध्य में इस भव्य आयोजन द्वारा नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति के सामर्थ्य और शौर्य का दर्शन कर रही है। उन्होंने श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि ‘हर हर महादेव’ के जयघोष के साथ आस्था के इस महोत्सव में जुड़ें।

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