Theatre: उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (प्रयागराज) प्रेक्षागृह में चल रहे त्रिधारा नाट्य समारोह की पहली शाम हास्य और व्यंग्य से भरपूर रही। बैकस्टेज संस्था ने हरिशंकर परसाई की रचनाओं पर आधारित नाटक ‘प्रेमियों की वापसी’ का मंचन किया, जिसका निर्देशन प्रवीण शेखर ने किया। नाट्यालेख प्रवीण शेखर, अमर सिंह और सक्षम मिश्रा ने तैयार किया। समारोह का शुभारंभ पूर्व संस्कृति मंत्री एवं कलापोषक सुभाष पांडेय तथा संस्कृत विद्वान प्रो. हरिदत्त शर्मा ने दीप प्रज्वलन कर किया।

नाटक (Theatre) में दिखाया गया कि मृत्यु के बाद भगवान के दरबार में पहुंचे प्रेमियों को भी विचित्र परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। उन्हें लगता है कि पृथ्वी पर जीवन अधिक सहज था, इसलिए वे घर वापसी की प्रार्थना करते हैं। लेकिन मनुष्य योनि में लौटना आसान नहीं होता और गंभीर संकल्प हंसी-ठट्ठे में बदल जाते हैं। प्रेम के नाम पर लिए गए बड़े फैसले भी इंसानी बहसों और विडंबनाओं में उलझकर हास्यास्पद हो जाते हैं।

प्रस्तुति में सतीश तिवारी (विधाता), अमर सिंह (प्रेमेंद्र), दिलीप श्रीवास्तव (धरमचंद/पुलिस), अजीत बहादुर (प्रेमभीरू/चाचा), चाहत जायसवाल (रंजना), उपासना तिवारी (रागिनी/हेडमिस्ट्रेस), सिद्धांत चंद्रा (डॉक्टर/अफसर), अभिषेक गुप्ता (हेडमास्टर/स्टॉफ) और कुमार सानू (प्रणय दास/सेक्रेटरी) ने अभिनय किया। प्रकाश संचालन टोनी सिंह, संगीत परिकल्पना अमर सिंह और रूपसज्जा हमीद ने की। परिकल्पना व निर्देशन प्रवीण शेखर का रहा। दर्शकों ने प्रस्तुति को खूब सराहा।


